पी.सी.एम.एस.डी. कॉलेज फॉर विमेन, जालंधर में आईसीएचआर द्वारा प्रायोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन

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पी.सी.एम.एस.डी. कॉलेज फॉर विमेन, जालंधर में आईसीएचआर द्वारा प्रायोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन
पी.सी.एम.एस.डी. कॉलेज फॉर विमेन, जालंधर में आईसीएचआर द्वारा प्रायोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन

Jalandhar(S.K Verma):पी.सी.एम.एस.डी. कॉलेज फॉर विमेन, जालंधर के हिस्ट्री विभाग द्वारा ‘रेलिवेंस ऑफ गुरु नानक देव जी टीचिंग इन कंटेंपरेरी टाइम’ पर आईसीएचआर द्वारा प्रायोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलित करके और देवी सरस्वती के आह्वान एवम दुनिया में ज्ञान और प्रकाश फैलाने और निरक्षरता और अज्ञानता को मिटाने की प्रार्थना के साथ हुई। इस अवसर पर विद्यालय की प्राचार्य डॉ. पूजा पराशर ने सभी गणमान्य व्यक्तियों एवं सम्मानित प्रतिनिधियों का स्वागत किया। कंवलजीत कौर ने (संयोजक, सेमिनार) ने इस सेमिनार के उद्देश्य के बारे में अतिथियों को अवगत करवाया । पी.सी.एम.एस.डी. कॉलेज की मैनेजिंग कमेटी के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट विनोद दादा ने इस अवसर पर शिरकत करके सेमिनार की शोभा बढ़ाई । प्रो. जगबीर सिंह (कुलपति पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय, बठिंडा) ने मुख्य भाषण दिया और सेमिनार के मुख्य विषय पर प्रकाश डालते हुए अपने उल्लेखनीय विचारों से दर्शकों को अवगत कराया। उन्होंने उपनिवेशवाद के कारण स्वदेशी भाषाओं विशेषकर हमारी मातृभाषा के नुकसान पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने ‘ब्रह्म’ की प्रासंगिकता पर जोर दिया जो निरपेक्षता का प्रतीक है जो जीवन और मृत्यु से परे है।प्रो. अवतार सिंह, (एसोसिएट प्रोफेसर, पंजाबी स्नातकोत्तर विभाग, रामगढ़िया कॉलेज, फगवाड़ा) इस सेमिनार के विशेषज्ञ थे। उनका प्रवचन मुख्य रूप से ‘सनातन धर्म’, सूफीवाद और सत्य को एक सर्वव्यापी और कालातीत गुण के रूप में संबंधित था। अपने समापन भाषण में, डॉ. रविंदर सिंह, (फेलो, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस स्टडी, राष्ट्रपति निवास, शिमला) ने गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं के विचार-विमर्श और प्रसार के माध्यम से इस दुनिया को अधिक जीवंत और शांतिपूर्ण बनाने के प्रयास में इस तरह के आयोजनों की प्रासंगिकता की सराहना की। उन्होंने कहा कि सिख धर्म ‘सनातन धर्म’ का विस्तार है, जो दुनिया का सबसे पुराना धर्म है। इस बात में कोई संदेह नहीं है कि प्रौद्योगिकी ने हमें बहुत जकड़ रखा है, लेकिन हमें इसका बुद्धिमानी से उपयोग करने की आवश्यकता है ताकि हम कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अनुकरण की दुनिया के नुकसान से बच सकें। वहां नानक की शिक्षाओं की प्रासंगिकता सामने आती है। इस शुभ अवसर पर प्रतिष्ठित विद्वानों और प्रोफेसरों के 104 शोध पत्रों वाली एक पुस्तक का भी विमोचन किया गया। डॉ. रेणु ने सभी अतिथियों का धन्यवाद किया। सेमिनार की कार्यवाही के दौरान मंच संचालन दिव्या बुधिया गुप्ता ने किया। यह सेमिनार महान गुरु की विचारधारा और संदेश पर सार्थक बातचीत के माध्यम से जीवंत और बौद्धिक प्रवचन का मंच साबित हुई। कॉलेज की प्रबंधन समिति के माननीय सदस्यों एवं प्राचार्य ने सेमिनार के सफल आयोजन के लिए हिस्ट्री डिपार्टमेंट को बधाई दी।

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