पी.सी.एम.एस.डी. कॉलेज फॉर विमेन, जालंधर की इकोनॉमिक्स एसोसिएशन द्वारा सामूहिक चर्चा का आयोजन

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पी.सी.एम.एस.डी. कॉलेज फॉर विमेन, जालंधर की इकोनॉमिक्स एसोसिएशन द्वारा सामूहिक चर्चा का आयोजन
पी.सी.एम.एस.डी. कॉलेज फॉर विमेन, जालंधर की इकोनॉमिक्स एसोसिएशन द्वारा सामूहिक चर्चा का आयोजन

Jalandhar(S.K Verma):पी.सी.एम.एस.डी. कॉलेज फॉर वूमेन जालंधर की इकोनॉमिक्स एसोसिएशन द्वारा “इज इंडिया रेडी फॉर कैशलैस इकोनॉमी ?” विषय पर एक सामूहिक चर्चा का आयोजन करवाया गया। इस परिचर्चा में विभिन्न स्ट्रीम की इकॉनॉमिक्स की छात्राओं ने बड़े उत्साह के साथ भाग लिया। इस चर्चा की शुरुआत बीएससी की कुमारी रितिका (इकोनॉमिक्स, सेमेस्टर पांचवां) द्वारा विषय का परिचय देकर और ‘कैशलेस इकोनॉमी’ का अर्थ समझा कर की गई। कुमारी पायल (बी.ए., सेमेस्टर पांचवां) ने कैशलेस लेनदेन के प्रासंगिक लाभों के बारे में बताया । कुमारी मानसी (बी.ए. सेमेस्टर पांचवा) के साथ कुमारी पूजा (बी.ए.सेमेस्टर तृतीय) ने भी सहायक तर्क प्रस्तुत किए। छात्राओं का विचार था कि लोग, विशेषकर युवा, पहले से ही कैशलेस प्रणाली को अपना चुके हैं और इसे उपयोग करना भी बहुत सुविधाजनक माना जा रहा है । कुमारी मनप्रीत और फिरदौस (बी.ए./बी.एड. सेमेस्टर पांचवा) और मानसी (बीएससी इकोनॉमिक्स) ने देश की कैशलेस अर्थव्यवस्था बनने की तैयारी के खिलाफ विचार प्रस्तुत किए। उनका विचार था कि जब तक पूरी आबादी शिक्षित नहीं हो जाती और आवश्यक बुनियादी ढांचा तैयार नहीं हो जाता, तब तक देश कैशलेस अर्थव्यवस्था बनने की उम्मीद नहीं कर सकता। इस चर्चा के बाद, यह निष्कर्ष निकाला गया कि कैशलेस लेनदेन के लाभ उनके नुकसान से अधिक हैं और इसलिए लेनदेन के डिजिटल तरीके को अपनाने के लिए एक वांछनीय वातावरण बनाया जाना चाहिए। कॉलेज की प्रबंधक समिति के सदस्य और प्राचार्य डॉ पूजा पराशर ने इकोनॉमिक्स डिपार्टमेंट के प्रयासों की सराहना की और कहा कि देश को कैशलेस अर्थव्यवस्था के पथ पर ले जाने के लिए लोगों को डिजिटल तरीकों के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए।

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