पीएयू के ग्राउंडों के दुरुपयोग को लेकर दीवान का पंजाब सरकार पर तीखा हमला

सरस मेले को रोकने के लिए राज्यपाल से हस्तक्षेप की अपील

शैक्षणिक संस्थान शिक्षा के केंद्र बने रहें, राजनीतिक तमाशों का मंच नहीं

लुधियाना, 6 अक्टूबर (हरीश) : जिला कांग्रेस कमेटी, लुधियाना (शहरी) के पूर्व अध्यक्ष एवं पंजाब लार्ज इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट बोर्ड के पूर्व चेयरमैन पवन दीवान ने भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए शैक्षणिक संस्थानों के ग्राउंडों और कैंपसों को गैर-शैक्षणिक कार्यक्रमों के लिए इस्तेमाल करने की प्रथा की कड़ी निंदा की है।

इस संबंध में, पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया को लिखे पत्र (कॉपी संलग्न) में दीवान ने कहा कि 28 सितंबर को शहीद भगत सिंह की जयंती को समर्पित ‘जश्न-ए-इंकलाब’ कार्यक्रम पीएयू के फुटबॉल और एथलेटिक्स मैदान में आयोजित किया गया, जिसके कारण कथित तौर पर खेल सुविधाओं को नुकसान पहुंचा। वहीं अब बिना किसी देरी के सरकार ने एक और कार्यक्रम (सरस मेला) 29 अक्टूबर से 5 नवंबर तक पीएयू के ग्राउंडों में आयोजित करने की घोषणा कर दी है। इस तरह बार-बार किए जा रहे इस्तेमाल से न केवल विश्वविद्यालय की गरिमा प्रभावित होती है, बल्कि इसके मुख्य शैक्षणिक और खेल मिशन को भी नुकसान पहुंचता है।

इस अवसर पर दीवान ने पीएयू को एक प्रमुख शैक्षणिक संस्थान बताते हुए कहा कि यहां छात्रों, शिक्षा, शोध और अकादमिक गतिविधियों को हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि 28 सितंबर को कैंपस को ‘जश्न-ए-इंकलाब’ के लिए मंच में बदल दिया गया था। यह एक संगीत संध्या थी, जिसमें मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शिरकत की। यह कार्यक्रम पीएयू के फुटबॉल और एथलेटिक्स मैदान में आयोजित किया गया था, जो परंपरागत रूप से खिलाड़ियों के लिए आरक्षित रहते हैं और जहां प्रवेश भी सीमित होता है। इस तरह का इस्तेमाल विश्वविद्यालय की गरिमा को प्रभावित करता है और इसके मुख्य मिशन शिक्षा एवं शोध से ध्यान भटकाता है।

दीवान ने यह भी कहा कि ‘जश्न-ए-इंकलाब’ कार्यक्रम के बाद छात्रों, खिलाड़ियों और सुबह सैर करने वाले लोगों ने पीएयू को केवल “राजनीतिक रैली ग्राउंड” बनाए जाने को लेकर आम आदमी पार्टी सरकार के प्रति कड़ा रोष व्यक्त किया है। उन्होंने राज्यपाल को अवगत कराया कि पीएयू में प्रस्तावित सरस मेले का विरोध अब केवल छात्रों तक सीमित नहीं रहा है। उन्होंने कहा कि पीएयू टीचर्स एसोसिएशन, नॉन-टीचिंग स्टाफ एसोसिएशन और एलुमनी एसोसिएशन के प्रतिनिधि भी अब इस विरोध में शामिल हो गए हैं और यह सवाल उठा रहे हैं कि विश्वविद्यालय की प्राथमिकता अकादमिक गतिविधियां होनी चाहिए या राजनीतिक तमाशे।

इस दौरान छात्र समुदाय के प्रति सहानुभूति व्यक्त करते हुए, दीवान ने कहा कि ‘जश्न-ए-इंकलाब’ कार्यक्रम के दौरान सबसे अधिक परेशानी पीएयू के छात्रों को झेलनी पड़ी। उन्हें भारी पुलिस बैरिकेडिंग, कान फाड़ देने वाले शोर और यातायात की अव्यवस्था का सामना करने के लिए मजबूर होना पड़ा। कार्यक्रम स्थल लाइब्रेरी और लेक्चर हॉल के बेहद करीब होने तथा मिड-टर्म परीक्षाएं नजदीक होने के कारण छात्रों की परेशानी और बढ़ गई है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि एक शैक्षणिक कैंपस को राजनीतिक मंच में बदलना प्राथमिकताओं की गलत दिशा को दर्शाता है।

दीवान ने कहा कि समाज के हर वर्ग से यह स्पष्ट और लगातार मांग उठ रही है कि शैक्षणिक संस्थान केवल शिक्षा, शोध और अकादमिक गतिविधियों के लिए समर्पित रहें, न कि राजनीतिक दिखावे के लिए। इस दौरान सभी संबंधित तथ्यों को राज्यपाल के ध्यान में लाते हुए दीवान ने पंजाब के राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि प्रस्तावित सरस मेले को पीएयू के मैदानों में आयोजित करने की अनुमति न दी जाए। उन्होंने कहा कि इस प्रमुख शैक्षणिक संस्थान की गरिमा को बनाए रखना बेहद जरूरी है। इसका कैंपस छात्रों, शिक्षा, शोध और वैज्ञानिक प्रगति के लिए आरक्षित रहना चाहिए, न कि इसे राजनीतिक गतिविधियों के मंच के रूप में इस्तेमाल किया जाए।

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