हिमाचल में धार्मिक भावनाएं भड़काने का नापाक प्रयास

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ब्यूरो रिपोर्ट – शिमला

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हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में गौबंस की मौत पर धार्मिक भावनाएं भड़काने का नापाक प्रयास किया गया | हालाँकि इस प्रयास को असफल कर दिया गया लेकिन , ऐसा अमानवीय चेहरा सामने आया कि मनुष्य और पशु के बीच का फर्क भी समाप्त होता नजर आया | एक तरफ देश प्रदेश गऊ को माता के सामान दर्जा दे रहा है तो दूसरी तरफ कुछ लोग इतने अमानवीय हो सकते हैं यह सोच कर भी मनुष्य हिर्दय सिहर उठे | घटना जिले के कुठेड़ा क्षेत्र की है जहां एक गाँव विशेष के कुछ लोग एक मृत गाय को दफनाने से न सिर्फ रोकते नजर आये,बल्कि उन्होंने इसे हंगामे से हिंसा तक बदलने की हर कोसिस की |

वास्तव में कुठेड़ा कस्वे में एक गऊ सदन है जिसकी देख रेख यहां के कुछ ब्यापारी मिल जुलकर करते हैं | बिना किसी सहायता के ये लोग इस गऊ सदन की तमाम जिम्मेदारियां उठा रहे हैं | लेकिन जब कोई गाय मर जाती है तो इसे दफनाने की जिम्मेदारी भी इन्ही लोगों पर आ जाती है | हालाँकि यह प्रक्रिया बेहद खर्चीली होती है लेकिन कुछ लोग इसे अपना इन्शानियत धर्म समझ कर पूरा कर रहे हैं ऐसे में उनकी तारीफ करना भी लाजमी है |

लेकिन इस सबसे अलग इसी क्षेत्र के एक गाँव विशेष का एक ऐसा धड़ा भी निकला जो इस सारे कार्य को रोकने पर अड़ गया | पहले कुछ युवकों ने इस सराहनीय कार्य को, डरा धमका कर रोकने का प्रयास किया और बाद में सोसल मिडिया का डर दिखाकर अपनी अमानवीय भावनाओं को सबके समक्ष किया |

जब क्षेत्र के बुद्धिजीबियों ने इन्हे ऐसा करने के लिए लताड़ा तो ये लोग अपना पक्ष रख रहे हैं कि जिस जगह इस गाय को दफनाया गया ,बहाँ से उनके गाँव को सड़क जाती है, जबकि उस जगह से इनका गाँव लगभग दो किलोमीटर दूर है | यह एक सरकारी जंगल था और गाय प्रेमियों ने जे सी बी मशीन की मदद से इस गाय को पूरी विधि पूर्वक दफनाया | इससे पहले भी ये लोग गाय को इसी तरफ दफनाते आये हैं, लेकिन इस बार अमानवीय संवेदनाओं से सुसज्जित ये लोग यहां हंगामा करने और इन लोगों को डराने धमकाने के लिए ही शायद आये थे |

हालाँकि यहां न तो इनकी निजी जमीन में यह सब किया गया और न ही नजदीक कोई गाँव या बस्ती है | लेकिन इन लोगों की इस सबके पीछे आखिर क्या मंसा थी यह जानना भी जरुरी है | क्यंकि शिमला के रोहरु में कुछ दिन पहले इसी प्रकार से हिंसा भड़की थी ….और यहां भी एक समूह विशेष की मंसा कुछ ऐसी ही प्रतीत हो रही थी | हालाँकि सोसल मिडिया पर जब इन्हे प्रताड़ित किया गया तो इन लोगों ने अपना पक्ष इस प्रकार रखा कि इस गाय को एक मोड़ आगे दफनाया जा सकता था, जबकि इस मार्ग पर हर मोड़ से किसी न किसी गाँव के लिए सड़क या रास्ता जाता है | यानी या तो ये लोग अपना अहम ऊंचा रखना चाहते थे, या हंगामा करना चाहते थे।

हालाँकि हमें गाय की सेवा करने बाले उन लोगों की तारीफ करनी चाहिए जो अपनी निजी आय से इन बेसहारा गायों को पकड़ पकड़ कर अपने गऊ सदन में जगह देते हैं और उनका सारा खर्चा उठाते हैं, और प्रशासन से बिनम्र आग्रह है कि ऐसे मामलों में हंगामा करने बाले इन लोगों के खिलाफ कड़ी कार्यबाही अम्ल में लाइ जाये ताकि भविष्य में लोग गाय की या दूसरी किसी प्रकार की समाजिक सेवा में भागिदारी से डरें सहमें नहीं |


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