हिमाचल के ऊर्जा मंत्री अनिल शर्मा ने दिया मंत्री पद से इस्तीफा

Shimla -:

महीने भर से प्रदेश में चल रहे सियासी द्वंद्व के बीच ऊर्जा मंत्री अनिल शर्मा ने मंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया है । मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के साथ चल रही जुबानी जंग के बीच शुक्रवार को मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। मुख्यमंत्री ने भी सिराज दौरे के दौरान केंद्रीय नेतृत्व से फोन पर चर्चा के बाद शर्मा के इस्तीफे को स्वीकार करने का एलान कर दिया। अनिल के इस्तीफे के साथ ही मंडी संसदीय सीट पर चल रहे सियासी घमासान के और तेज होने का अंदेशा है।
हालाँकि अनिल शर्मा हिमाचल के विधानसभा चुनावों के समय ही कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे ,लेकिन उनके बेटे आश्रय को कांग्रेस पार्टी ने मंडी लोकसभा से लोकसभा के लिए प्रत्याशी बनाया है ऐसे में अनिल शर्मा के सामने धर्मसंकट पैदा हो गया था । भाजपा उनपर बार बार चुनाव प्रचार में उतरने को कर रही थी लेकिन अपने ही बेटे के खिलाफ अनिल ने चुनाव प्रचार करने से मना कर दिया था , इतना ही नहीं उन्होंने भाजपा की रैलियों तक में जाना बंद कर दिया था ताकि कोई न कोई बहाना बन सके जिससे पार्टी छोड़ने में आसानी हो । हालाँकि अनिल शर्मा के मन में शायद कहीं न कहीं यह डर भी रहा होगा कि मंडी सीट उनके बेटे के लिए बेहद कठिन है इसीलिए उन्होंने अभी तक भाजपा से इस्तीफ़ा नहीं दिया है ।
अनिल शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री के उनके मंत्री के गुम होने वाले बयान से वह आहत हैं और जब मुख्यमंत्री को विश्वास ही नहीं है तो सरकार में रहने का क्या मतलब। इसके साथ ही अनिल ने फिर दोहराया कि वह न तो मंडी में पार्टी के किसी कार्यक्रम में भाग लेंगे और न मंडी संसदीय क्षेत्र के कांग्रेस से लोकसभा प्रत्याशी अपने बेटे आश्रय शर्मा के पक्ष में प्रचार करेंगे। अनिल के इस्तीफे के साथ ही अब उनके भाजपा में बने रहने को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। कि कहीं न कहीं उन्हें अपने बेटे के जीतने पर संदेह है जिसके चलते वह भाजपा में ही बना रहना चाहते हैं और चुनावों के बाद फिर प्रदेश भाजपा में रहकर ही प्रदेश सरकार के मंत्री बनने की जुगत करेंगे ।

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