हार दिखी तो धुमल याद आये

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जितेन ठाकुर – शिमला
हिमाचल प्रदेश में भाजपा की जयराम सरकार को बने हुए लगभग दो वर्ष पूरे होने को हैं | मगर इस अंतराल में सरकार ने नित नए प्रयोग किये, लेकिन कहीं न कहीं न तो प्रयोग सिरे चढ़े न जनता में वह रुतवा बन सका | सरकार में निर्णय लेने की दृढ शक्ति कभी नहीं दिखी , बहुत सी बार निर्णय डरते डरते लिए गए और विरोध होने पर निर्णय बापिस भी ले लये गए | भाजपा के भीतर एक नै भाजपा तैयार करने की पूरजोर कोशिश की गई मगर यहां भी सफलता कम ही हाथ लगी |
लोकसभा चुनावों में भाजपा ने मोदी फैक्टर के सहारे सभी विधानसभा सीटों पर से बढ़त हासिल की , ऐसे में नई भाजपा को लगने लगा कि शायद उनका कोई प्रयोग सफल हो गया होगा | लेकिन अपने बूते लड़ने बाले उपचुनावों में भाजपा की नई टीम की साँसें फूलने लगी तो फिर से धूमल याद आने लगे | अब भाजपा की नई टीम धूमल के कंधे पर से निशाना साधने की कोशिश कर रही है | खासकर पच्छाद सीट , जहां निर्दलीय उमीदवार के जीतने की संवहावनाएँ नजर आ रही हैं , वहां नई भाजपा के सारे प्रयोग धरे के धरे रह गए नजर आ रहे हैं |
हालाँकि कुछ दिन ही गुजरे थे जब केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर को नई भाजपा टीम ने हाशिये पर धकेलने की नाकाम कोशिश की थी | मंडी और शिमला में भाजपा नेताओं और विधायकों ने , अनुराग ठाकुर के कार्यक्रम से दूर रहकर दिखाने की कोशिश की, कि अब जयराम युग की शुरुआत हो चुकी है | मगर भाजपा के राष्ट्रिय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा के हिमाचल में अभिनन्दन समारोहों में भाजपा की नई टीम को समझ ही नहीं आ रहा था कि जनसम्पर्क कैसे किया जाए | इसका नतीजा यह हुआ कि बिलासपुर और मंडी दोनों ही जगह पर टीम भाजपा जनसमूह को लाने में बुरी तरह से नाकाम रही |
अब अगर दोनों उपचुनावों में से , भाजपा एक भी सीट हार जाती है , तो सीधे टूर पर इसकी जिम्मेदारी जयराम ठाकुर पर जाएगी | ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल की याद आई , कि हो सकता है उन्ही के सहारे नैया किनारे लग सके | धूमल को पच्छाद उपचुनावों में पार्टी का प्रचार करने का जिम्मा सौंपा गया | अब यह तो समय ही बताएगा कि हासिये पर धकेली गई धूमल भाजपा टीम इन चुनावों में नई भाजपा टीम का साथ देती है या नहीं |


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