मुल्य घट गए पर रेस्तरां के मेन्यू नहीं बदले

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संतोष

पिछले डेढ़ वर्ष की तुलना में आज दालों के मुल्य आधे से भी कम रह गए हैं लेकिन अधिकांस रेस्तरां के मेन्यू में जो दाम बढे थे वह कम ही नहीं हुए । रेस्तरां बाले ग्राहकों से मनमाने दाम बसूल रहे हैं लेकिन किसी अधिकारी ने इसकी तरफ ध्यान ही नहीं दिया । खासकर हिमाचल जैसे छोटे राज्य के लिए यह बहुत अहम् बात हो जाती है क्यूंकि अक्सर कहा जाता है कि छोटे राज्य को संभालना बहुत आसान होता है । तो ऐसे में क्या हमारे अधिकारी जानबूझकर मौन हैं , या किसी बात ने उन्हें मौन रहने पर मजबूर किया हुआ है यह सवाल आज उठना लाजमी है । सवाल यह भी उठना लाजमी है कि गली मोहल्ले में बिकने बाले प्याज-टमाटर के दाम पांच रुपये बढ़ जाए तो लोग हो-हल्ला मचा देते हैं लेकिन बड़े रेस्तरां बालों ने दाम दोगुने कर दिए लेकिन किसी के हल्क से अबाज नहीं फूट रही ।

लगभग डेढ़ वर्ष पहले अचानक दालों के मुल्य बढ़ गए । अचानक 40 से 50 रुपये किलो बिकने बाली चना दाल 120 रुपये तक जा पहुंची । ऐसे में रेस्तरां मालिकों ने भी अपने मेन्यू दुबारा छपबाये और उनके रेस्तरां में भी दाम दोगुने हो गए । रेस्तरां में बिकने बाली चना दाल जो लगभग 75 से 80 रुपये प्रति प्लेट बिका करती थी उसके दाम 125 से 145 तक हो गए । खैर दालों के मुल्य शिखर पर थे ऐसे में रेस्तरां बालों के मुल्य वृद्धि पर टिक्का-टिप्पणी नहीं की जा सकती थी । लेकिन पिछले लगभग सात से आठ महीनों में दालों के मुल्य फिर गिर गए हैं और मुल्य दोबारा पुराने मूल्यों जितने ही आ गए हैं । दालों के मुल्य तो आधे हो गए लेकिन रेस्तरां मालिकों के मेन्यू अभी तक नहीं बदले हैं । रेस्तरां में अभी भी बही दोगुनी कीमत ही बसूली जा रही है ,और शायद इसकी तरफ किसी का ध्यान ही नहीं ।

हिमाचल प्रदेश में हर वर्ष लाखों सैलानी घूमने आते हैं , लेकिन रेस्तरां और ढाबा मालिकों की इस लूट के चलते हर कोई इनके हाथों लुटने को मजबूर है । सवाल यही उठता है कि जब दालों के मुल्य दोबारा आधे रह गए तो रेस्तरां में परोसी जाने बाली दालों के मुल्य भी कम हो जाने चाहिए थे । लेकिन ऐसा नहीं हुआ, बेसक किसी किसी रेस्तरां और ढाबे बालों ने मुल्य में पांच से दस रुपये की कटौती की है लेकिन अधिकांश रेस्तरां में बही पुराने मेन्यू चलते आ रहे हैं । हिमाचल में जिला प्रशासन खाने पीने की अधिकांस वस्तुओं के दाम निर्धारित करता है , लेकिन जिला प्रशासन की नाक तले यह सारा काला कारोबार फल फूल रहा है और सरेआम लोग लुट रहे हैं । किसी अधिकारी को लोगों कि चिंता नहीं है, कभी किसी अधिकारी ने इन रेस्तरां के मेन्यू नहीं जांचे । जांचे होते तो यह खेल कभी का समाप्त हो गया होता । लेकिन इन लोगों की मनमानी ही है कि इनके मुल्य निर्धारण की कोई सीमा नहीं है न ही इन पर कोई सरकारी नकेल है । किसी बस्तु का मुल्य एक फीसदी बढ़ने पर ये लोग आठ से दस फीसदी मुल्य बढ़ा लेते हैं लेकिन मुल्य घटने पर मुल्य घटाए नहीं जाते ।


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