भागवत महापुराण कथा – स्वामी स्वयमानन्द जी

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  

(क्राइम सिटी न्यूज़ संदीप वर्मा )

(गगरेट) में व्यास पीठ पर विराजित स्वामी स्वयमानन्द जी महाराज ने श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन वामनावतार, श्रीकृष्ण जन्म एवं नन्दोत्सव के लीलाओं का कथा सुनाकर कर उपस्थित श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया।श्रीमद् भागवत सप्ताह कथा के पांचवें दिन की कथा में विश्व विख्यात कथा व्यास श्रद्धेय स्वामी स्वयमानन्द जी महाराज ने बताया कि भक्त के भाव को अपने इष्ट के प्रति भक्त की आस्था को केवल प्रभु ही समझ सकते हैं। इसीलिये जीव को अपना दु:ख संसार के सामने नहीं केवल प्रभु के सामने ही प्रकट करना चाहिये। प्रभु पालनहार हैं वो शरण में आये भक्त के सारे दु:खों को हर लेते हैं। स्वामी जी ने कहा कि भगवान का परम भक्त प्रहलाद जिसे कि पिता हिरण्य कश्यपु के द्वारा अति भयंकर कष्ट दिये गये। यहाँ तक कि श्री प्रहलाद जी को विष पिलाया गया, हाथी से कुचलवाया गया, अग्नि में जलाया, तरह तरह कि यातनायें दी गई। परन्तु श्री प्रहलाद जी प्रत्येक जगह अपने प्रभु का ही दर्शन करते थे। इसलिये उन्हें कहीं भी किसी भी प्रकार की पीड़ा का एहसास नहीं हुआ। उन्हें विश्वास था कि हमारे प्रभु सदा सर्वदा-सर्वत्र विराजमान है। तो प्रभु श्री नृसिंह भगवान भक्त के विश्वास को पूर्ण करते हुए पत्थर के खंभ से प्रकट होकर दिखा दिया कि वो भक्त की इच्छा एवं विश्वास को पूर्ण करने के लिये कहीं भी किसी भी समय प्रगट हो सकते है। स्वामी जी ने वामन अवतार की कथा सुनाते हुए कहा कि भगवान किसी न किसी रूप में हमारी रक्षा करते है। राजा बलि का उद्धार करने भगवान को बावन रूप में आना पड़ा था। संतश्री ने नंदोत्सव का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि जो दुसरों को आनंद दे वह नंद और जो दूसरों को यश दे वह यशोदा है। एैसे ही दाम्पत्य में परम आनंद श्रीकृष्ण का जन्म होता है स्वामी जी ने कहा कि जीव किसी की निन्दा स्तुति करने की जगह भगवान की ही चर्चा करनी चाहिए। प्रभु कथा श्रवण करने से प्रभु के चरित्रो का चिन्तन करने से प्रभु कृपा निश्चित रूप से प्राप्त होती है उन्होंने कहा कि विशाल पेंड़ जिस प्रकार से छोटी सी कुल्हाड़ी से कट जाता है उसी प्रकार से प्रभु के चरण कमलों का स्मरण करने से जीव के सारे पांप कट जाते है इसके लिये उसे प्रभु की शरण में आना होगा। विशेष महोत्सव के रूप में आज श्री कृष्ण जन्म नन्दोत्सव धूम-धाम से मनाया गया। संतश्री ने श्री स्वयमानन्द जी महाराज ने कहा कि भागवत कथा एक एैसी कथा है जिसे सुनने ग्रहण करने से मन को शांति मिलती है अपने शरीर में भरी मैल को साफ करने के लिए अगर इसे मन से ग्रहण करें तो यह अमृत के समान है। श्राीमद् भागवत कथा महापुराण में प्रकाश लंबरदार अश्वनी जसवाल ,अनिल कुमार, सुनील कुमार ,जनक राज कुमापरिवार ,अरविंद चक्रवर्ती, रमेश शुक्ला ,देवी लाल सांडिल, जगरनाथ, प्राणनाथ, महंत मदन लाल ,मेहरचंद पराशर, सतपाल, सागर विशिष्ट, मंगाराम, देवी शर्मा, जनक शर्मा ,भी उपस्थित के कथा समापन पश्चात आरती, पूजन एवं प्रसाद वितरण किया गया।


Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •