फोटोसेशन कराने के बहाने बच्चों के शवों से सियासत

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( जितेन ठाकुर – हिमाचल )

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में हुए दर्दनाक हादसे में 27 स्कूली बच्चों की जान चली गई थी । लेकिन इस घटना का सबसे शर्मनाक चेहरा तब सामने आया , जब केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा और मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के फोटोसेशन के लिए इन बच्चों के शवों को ही , उनके परिजनों को सौंपने से रोक लिया गया । मासूमों के परिजनों को बताया गया कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के आने के बाद ही शव सौंपे जाएंगे । कुछ परिवार, जिन्हें रात को शव सौंपे जा चुके थे, उनसे भी शव वापस मंगाए गए । दुर्घटना का शिकार हुए 23 मासूमों के शव नूरपुर और 3 के शव पठानकोट में थे । ऐसे में जिन तीन बच्चों की मौत पठानकोट के अस्पताल में हुई, उनके शव भी नूरपुर के अस्पताल में पहुंचाए गए । ताकि मुख्यमंत्री के हाथों शव सौंपे जा सकें और फोटोसेशन पूरा हो सके ।

केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा और मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने अपनी राजनीती का ऐसा स्याह चेहरा दिखाया जिसे हर माँ-बाप कभी भूल नहीं पायेगा । मासूमों के शव सौंपने के लिए मंच का निर्माण किया गया और उसके जरिये दोनों नेताओं ने ऐसे फोटोसेशन किया जैसे कोई बड़ी उपलब्धि दिखाई जा रही हो । साधारण सी जिंदगी जीने बाले हिमाचल में इस प्रकार राजनीती का नाटक शायद पहली बार हुआ है । एक तरफ मासूम बच्चों के परिजन दहाड़े मार कर रो रहे थे तो दूसरी तरफ नेता शवों पर हार डाल कर फोटो खिंचाते रहे । बच्चों की लाशों पर राजनीति के बारे जब केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा से पुछा गया तो उन्होंने बताया कि उन्हें पता ही नहीं कि शवों को रोक कर रखा गया है । हालाँकि रात भर तो नूरपुर अस्पताल में कुछेक चिकित्षक और नर्सें ही घायल बच्चों के इलाज में जुटी रहीं, लेकिन जैसे ही नेताओं के आने का समय हुआ तो अस्पताल के आला अधिकारी भी भरी भरकम अमला लेकर पहुँच गए ।

ये कैसी श्रंद्धाजलि है जिसमें पीड़ा तो दिखाई नहीं दे रही सिर्फ चेहरा चमकाने की कोसिस की जा रही है । पूरे मामले से सवाल उठना लाजमी है कि क्या ये सरकार सिर्फ फोटोसेशन के लिए ही इन्शानियत का चोगा पहनना चाहती है ..? क्या हर काम फोटोसेशन के लिए ही किया जायेगा । अगर केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा और मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का , बच्चों के शवों के साथ फोटोसेशन नहीं होता तो क्या सरकार पर आफत आने बाली थी । इन मासूमों के परिजन अपने चहेतों के शवों के लिए इन्तजार कर रहे थे ,ऐसे में फोटोसेशन जरुरी था या तड़पते परिजनों को शव सौंपे जाना जरुरी था यह सवाल भी उठना लाजमी है । हालांकि इस ओछी घटना से पूरा प्रदेश गुस्से में है , क्यूंकि यहां राजनीती का ऐसा चेहरा देखने को मिला है जिसमें इन्शानी संवेदना तो दिखाई नहीं दे रही लेकिन ओछापन आने चरम पर लग रहा है ।

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https://www.youtube.com/watch?v=tbFivoHx5OQ


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