गुरूओं पीरों द्वारा शुरू किए औरत को बराबरता के सिद्धांत को पेश करती है ‘मुंडा ही चाहीदा’ -हरीश वर्मा

-फिल्म के माध्यम से समाज की बुराइओं के खिलाफ आवाज उठाने की कोशिश की गई है – रुबीना बाजवा

नीरू बाजवा इंटरटेनमैंट और श्री नरोतम जी फिल्म के बैनर तले आ रही फिल्म ‘मुंडा ही चाहीदा’ आज के समाज में औरत की स्थिति और विवाह के बाद लड़को की लालसा को पेश कर एक संदेश देने वाली फिल्म है। प्रसिद्ध अदाकारा नीरू बाजवा, अंकित विजन, नवदीप नरूला, गुरजीत सिंह और संतोष सुभाष थीटे ने फिल्म को प्रोड्यूस किया है जबकि संतोष सुभाष और दीपक थापर ने डायरैक्टर के तौर पर भूमिका निभाई है। फिल्म की कहानी संतोश सुभाष थीटे और डायलॉग दीप जगदीप जैदी की तरफ से लिखे गए हैं। फिल्म में मुख्य भूमिकाएं हरीश वर्मा और रुबीना बाजवा की तरफ से निभाई गई हैं जो कि ट्रेलर रिलीज होने के बाद दर्शकों को काफी पसंद आ रही हैं। इस बारे में बोलते डायरैक्टर संतोष सुभाष थीटे ने कहा कि फिल्म आज की बन रही फिल्मों से बिल्कुल अलग है और पुराने सोच विचारों से ऊपर उठ कर नई तकनीकों के बारे में रौशनी डालती है। उन्होंने कहा कि फिल्म में टैस्ट ट्यूब बेबी जैसे गंभीर मुद्दे को हलके ढंग के साथ पेश करके आज के समाज को शीशा दिखाने की कोशिश की गई है। अदाकार हरीश वर्मा ने कहा कि उनको इस फि़ल्म में काम करते मान महसूस हुआ है क्यों जो यह फिल्म समाज की एक बुराई के बारे में संदेश देती है कि किस प्रकार हर परिवार विवाह के बाद बहु से लड़कों की ही इच्छा करता है। उन्होंने कहा कि गुरूओं पीरों द्वारा शुरू किए औरत को बराबरता के सिद्धांत को पेश करती यह फिल्म पंजाबी दर्शकों को जरूर पसंद आएगी। अदाकारा रुबीना बाजवा ने कहा कि यह फिल्म एक संपूर्ण फिल्म है जिस में कि कॉमेडी ड्रामा के इलावा एक गंभीर मुद्दे पर भी चर्चा की गई है। उन्होंने कहा कि समाज में टैस्ट ट्यूब बेबी एक कलंक के तौर पर पेश किया जाता है और देहाती क्षेत्रों में इस पर कई सवाल उठाए जाते हैं परंतु फिल्म में इस को बहुत ही सहज ढंग के साथ पेश कर समाज की इस बुराई के खिलाफ आवाज उठाने की कोशिश की गई है। संगीतक पक्ष से फिल्म में पांच गीत शामिल किये गए हैं जिन को हरमनजीत, हरिन्दर कौर और कप्तान की तरफ से लिखा गया है जबकि फिल्म का संगीत गुरमीत सिंह, गुरमोह और गुरचरन सिंह ने तैयार किया है। फिल्म के गानों को रौशन प्रिंस, कमाल खान, गुरनाम भुल्लर, जोर्डन संधू और मन्नत नूर ने अपनी, आवाजों के साथ सजाया है। फिल्म के दृश्यों को चण्डीगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में फिलमाया गया है।

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