गायों पर राजनीती या सरकार की नियति

हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी और कम आवादी बाले राज्य में भी सड़कों पर हजारों बेसहारा गायें घूम रही हैं यह दुर्भाग्य नहीं है बल्कि सरकारों की नाकामयाबी का सबूत है | प्रदेश में बहुतेरे ऐसे साधन हैं जिनके जरिये इन गायों को स्थाई रूप से बसाया जा सकता है | प्रदेश की कई संस्थाएं और समाज सेवी लोग इस कार्य को बिना सरकार का धन लगाए भी करने को तैयार हैं लेकिन सरकार को सोच न जाने कहाँ टिकीं हुई है | सरकार न तो गायों की इस समस्या के प्रति गंभीर है और न ही इसका स्थाई हल निकालना चाहती है | ऐसे गौ सदन खोले जा रहे हैं जिनमें भरी भरकम सरकारी धन खर्च हो और वर्षों तक लगातार खर्च होता ही चला जाए | औसतन एक गाय पर सरकार हर वर्ष लगभग 25000 रुपये खर्च कर रही है इस हिसाब से अगर प्रदेश में 15 हजार गायें भी सरकारी संरक्षण में पल रही हैं तो हर वर्ष लगभग 37 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं | इसके आलावा इनके रहने के लिए जिन गौ सदनों का निर्माण कर रही है उन पर भी हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं |

यह बात समझ से परे हैं कि सरकार इनके स्थाई हल की बजाय अस्थाई पुनर्वास पर ही क्यों जोर दे रही है | जो संस्थाएं मात्र 10 से 15 करोड़ खर्च करके पूरे प्रदेश से इस समस्या का हल निकालना चाहती हैं उन्हें दरकिनार करके सरकार ठेकेदारों के चंगुल में फंसने का प्रयास करती जा रही है | वास्तव में गौ सदन के अधिकतर लोग इसे ब्यापार की तर्ज पर ले रहे हैं | ये लोग किसी की गाय को यहां रखने के लिए उनसे मोती रकम बसूल करते हैं और सरकार से भी मोटा अनुदान प्राप्त करते हैं मगर जब इनके पास संख्या कुछ बढ़ जाती है तो ये लोग रात को ही गायों को हाँक कर या गाडी में भर कर दूर स्थान पर छोड़ जाते हैं | गायें वहां फसलों को क्षति पहुंचती हैं ऐसे में लोग फिर से धन एकत्रित करके इन्हे गौ सदन में छोड़ आते हैं | और इसी तरह अधिकतर से गौ सदन हर महीने मोटी कमाई करते रहते हैं |

इस पूरे प्रकरण पर सरकार भी आँखें मूंदे हुए सब देखती तो है ,लेकिन न देखने का एक चल लगातार चल रहा है | जितना धन सरकार पांच वर्षों में इन गायों की देखरेख पर खर्च कर देती है उनका बिस्वा हिस्सा भी इस समस्या का स्थाई समाधान कर सकता है | लेकिन सरकार की आखिर इस सब के पीछे क्या मनसा है यही समझ से परे है | क्यूंकि आखिर सरकार क्यों इसका स्थाई हल नहीं चाहती ..? आखिर क्यों सरकार सिर्फ और सिर्फ, लगातार धन खर्च करना चाहती है , समाधान नहीं …?

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