इन्वेस्टर मीट के वहाने

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  

Shimla- :

प्रदेश में हो रही गलोबल इन्वेस्टर मीट से सरकार को पूरी उम्मीद है कि निवेशक हिमाचल का रुख करेंगे । लेकिन एक कमी भी जरूर खलेगी ,वह है हिमाचल के दो बड़े नेताओं को इस इन्वेस्टर मीट से दूर रखना । आखिर ऐसा क्यों है कि प्रदेश सरकार इन दोनों नेताओं को इससे दूर ही रखना चाह रही है। इस मेगा इवेंट में हिमाचल भाजपा से जुड़ी दो बड़ी हस्तियों का किनारा आजकल हर जगह चर्चा का विषय बना हुआ है। इस इवेंट के लिए अब तक हुई बैठकों में भाजपा के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा और केंद्रीय वित एवं कारपोरेट राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर सिर्फ मेहमान की तरह ही बुलाये गए हैं । इन्वेस्टर मीट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गृह मंत्री अमित शाह सहित अन्य केंद्रीय मंत्री भाग ले रहे हैं, लेकिन केंद्र में बैठे प्रदेश के दो बड़े नेता इस इवेंट को बड़ा लाभ दे सकते थे मगर उन्हें इससे लगभग दूर ही रखा गया है ।
कुछ राजनितिक विचारक मान रहे हैं कि दोनों ही बड़े नेता , जयराम के लिए राजनितिक खतरा बन सकते हैं । यह भी एक कारण है कि जयराम सरकार इनके आलावा खुद ही कुछ कर दिखाना चाहती है । राजनितिक विचारक उम्मीद लगा रहे थे कि प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन हो सकता है । बेसक यह परिवर्तन अगले विधानसभा चुनावों से पहले ही क्यों न हो । हरियाणा और महाराष्ट्रा में हुए चुनावों के बाद तो हिमाचल में नेतृत्व की संभावनाएं और बढ़ रही थीं । इस सब के बीच जयराम ठाकुर कुछ कर दिखाना चाह रहे हैं , ताकि उन्हें कमजोर न आँका जा सके । यह भी एक कारण हो सकता है कि दोनों नेताओं के बिना खुद को मजबूत और बड़ा नेता साबित करने के लिए दोनों को इस इवेंट से दूर ही रखा गया हो ।

प्रदेश में हो रहे इस बड़े इवेंट से निवेशक आते हैं या नहीं , यह तो समय ही बताएगा । यह भी संभव है कि निवेशकों को न्योता देते देते कहीं प्रदेश के हितों पर प्रहार हो जाए । वास्तव में जब सरकार निवेशकों के सामने, निवेश को लेकर टकटकी लगाकर देख रही होगी , तक निवेशक भी अपनी शर्तों को मनवाने की पुरजोर कोशिश करेंगे ।प्रदेश में जमीन खरीदने को लेकर हर बड़ा निवेशक लालाइत है । ऐसे में जब सरकार खुद ही उन्हें रास्ता दे रही हो , तो उसी रास्ते से ये लोग अपनी मंजिल तक पहुँचाने की पुरजोर कोशिश करेंगे । इससे पहले भी निवेशक हिमाचल तो आते गए , मगर सिर्फ तब तक ही टिके रहे , जब तक उन्हें सस्ती बिजली और टेक्स में छूट मिलती रही । ऐसे में इसकी क्या गारंटी होगी कि निवेशक अपना हिट साध कर किनारे नहीं होंगे ।

कुछ निवेशक आ भी जाते हैं तो इससे हिमाचल को कितना लाभ होगा, यह भी प्रश्न उठना लाजमी है । छोटे से हिमाचल में मजदूरी करने को इतने लोग ही नहीं मिलते ,जो दिन रात कारखानों में मजदूरी करेंगे । ऐसे में मजदूर तो बाहरी राज्यों के ही बुलाने पड़ेंगे । जहां तक अधिकारियों की बात है , तो उन्हें कोई भी कंपनी किसी राज्य की जरुरत को देखकर नहीं रखती । अधिकारी हमेशा से ही योग्यता के आधार पर रखे जाते हैं । ऐसे में प्रदेश को इस सारे झमेले से ,मात्र कुछ टेक्स ही प्राप्त हो पायेगा ।
वास्तव में पहाड़ों पर कारखाने लगाने की जरुरत ही क्यों है ,प्रश्न तो यह भी होना चाहिए । जितना धन इन्वेस्टर मीट पर खर्च किया जा रहा है , अगर उतना ही धन किसी एक शहर की सड़क पर खर्च कर देते , तो वहां सैलानी दौड़े चले आते । सैंकड़ों लोगों को वहां बैठे बिठाये कमाई का साधन मिल जाता । प्रदेश में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं ,लेकिन सरकार अपनी संकीर्ण सोच को सिर्फ कारखानों और बड़े बड़े कम्पनी दफ्तरों तक ही सीमित रखना चाहती है ।


Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •