आपके किचन में कैंसर है

जितेन ठाकुर –
आप हर रोज कैंसर पैदा करने बाला तेल खा रहे हैं ये जान कर आपको जरूर हैरानी होगी । जी हाँ हम आपको डराना नहीं चाहते लेकिन सतर्क करना चाहते हैं कि सरसों के तेल में मिलावट इतनी अधिक है कि हर तीसरा आदमी कैंसर की चपेट में आने बाला है । देश में बिकने बाले तेल में 90 फीसदी से अधिक तेल नकली हैं, जिनमें बड़े ब्रांड भी शामिल हैं । हालाँकि कई लोग बड़े बड़े नामी ब्रांड इस्तेमाल करते हैं जिनमें सरसों के तेल कि तरह गंध तक मिलाई जाती है । बाजार में बिकने बाला एक एक नामी ब्रांड तो इस केमिकली गंध कि इतना अधिक मिला रहा है कि,उसे गरम करते समय आँखों से आंसू तक निकल आते हैं, शायद वह भी भूल गया है कि असली सरसों के तेल में इतनी अधिक गंध होती ही नहीं । सरसों के तेल में पेप्साइड ऑयल (कारखानों में काम में लिया जाने वाला ऑयल) मिलाया जाता है। जिससे पेट की बीमारियां और कैंसर तक हो सकता है। सरसों तेल में अरंडी, सत्यानाशी, सोयाबीन और पॉम ऑयल के अलावा कई तरह के केमिकल्स मिलाए जाते हैं। मिलावटखोर राइस ब्रॉन को भी सरसों के तेल में मिलाकर बेच रहे हैं ।

भारत में विदेशों से खराब या इस्तेमाल हो चूका पेट्रोलियम तेल आयात किया जा रहा है । यह वह तेल है जो गाड़ियों या बड़े कारखानों में प्रयोग के बाद खराब हो चूका है । लेकिन मुनाफाखोर इस तेल को रिफाइन करके इसमें खाने के तेल की गंध और रंग मिलाते हैं और यह आपकी थाली में पहुँच जाता है ।

कोई भी दुकानदार खुला खाने का तेल नहीं बेच सकता लेकिन बहुत से लोगों को यह पता ही नहीं है । हालाँकि आज नामी कंपनियां भी मिलाबती तेल बेच रही हैं लेकिन मजबूरी यह भी है कि तेल की खपत बहुत अधिक है जबकि उद्पादन लगातार कम होता जा रहा है ।

कैसे करें पहचान ..?
आप खुद अपने कच्ची घनी यानि सरसों के खाने बाले तेल की जांच कर सकते हैं | आप तेल की बोतल को फ्रिज में रखें । एक या दो दिन में अगर तेल के बीच कुछ चक्क्ते से पड़ने लगें. यानी इसमें कुछ जमने सा लगे तो यह तेल नकली है ।
एक चम्मच सरसों के तेल में पांच मिलीलीटर नाइट्रिक एसिड (HNO3 ) मिलाएं ,अगर इसमें से पीले रंग के हल्के हल्के गुब्बारे से बनकर किनारे लगने लगें,या संत्री रंग होने लगे तो इसमें सत्यानाशी का तेल मिला हुआ है ।
तेल को हाथ पर मलें ,अगर यह रंग छोड़ता है तब भी यह नकली है क्यूंकि ऐसे तेल में गंध और रंग सिर्फ केमिकल से उत्त्पन्न किये जाते हैं जबकि यह तेल है ही नहीं ।
आप वेरोमिटिंग भी जांच कर सरसों के तेल का पता लगा सकते हैं । सरसों के तेल में वेरोमिटिंग 58 से 60.5 के बीच होते हैं ।


लोगों ने तिलहन फसलें उगाना ही छोड़ दिया है क्यूंकि मेहनत करने से सबको डर लगता है । देशी घी से लेकर सरसों का तेल ,हर चीज नकली खाई जा रही है । हालाँकि लोगों कि यही सोच होती है कि हम तो कई दिनों से खा रहे हैं या बहुत से लोग खा रहे हैं, ऐसे में किसी को कुछ हुआ तो नहीं । लेकिन कभी कैंसर का टेस्ट करवाकर देखिएगा, आपको टी एल सी से ही पता लग जाएगा कि आपके शरीर में कितने प्रकार के कैंसर ने डेरा जमा दिया है ।
हालाँकि पश्चिमी देशों में तेल का प्रयोग किया ही नहीं जाता, पौराणिक इतिहास में भी देशी घी को ही खाने में प्रयोग किया जाता था । जबकि बिना तेल के भी तड़का लगाने की बिधि थी जो आज लुप्त सी हो चुकी है । ऐसे में अगर आप अपने बच्चों को जिंदगी देना चाहते हैं तो तेल खाना बंद कर दें ,क्यूंकि जब तिलहन ही उत्पन्न नहीं किया जा रहा तो तेल किस चीज से निकलेगा |

मर्जी है आपकी…..आखिर जिंदगी है आपकी

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